हनुमान मंदिर से सटाकर सजीं दुकानें, निर्धारित L-शेप के बजाय U-शेप में मनमाना आवंटन; 50 से अधिक दुकानों की व्यवस्था पर उठे सवाल
सोनभद्र (शक्तिनगर)। दीपावली के मद्देनजर ज्वालामुखी मंदिर मेला परिसर में लगाई गई अस्थायी पटाखा दुकानों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों के बावजूद परिसर में कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी किए जाने का आरोप है। मंदिर के समीप पटाखा दुकानों का संचालन, निर्धारित L-आकार के बजाय U-आकार में दुकानों की कतारें और आसपास स्थित रिहायशी मकानों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।
निर्धारित L-शेप के बजाय U-शेप में दुकानें, लेआउट पर सवाल
पटाखा दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था के तहत निर्धारित L-आकार में दुकानों को व्यवस्थित किया जाना चाहिए, लेकिन ज्वालामुखी मेला परिसर में इसका पालन नहीं किए जाने का आरोप है। यहां दुकानों को U-आकार में लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्धारित लेआउट की जगह मनमाने तरीके से दुकानों की व्यवस्था की गई है। इससे दुकानों के बीच सुरक्षित दूरी, आवागमन और आपातकालीन स्थिति में निकासी की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। सवाल यह है कि जब दुकानों का लेआउट पहले से निर्धारित है, तो फिर मौके पर अलग व्यवस्था किसके निर्देश पर की गई?
मंदिर से सटी दुकानें, 50 मीटर की दूरी का नियम कहां?
स्थानीय लोगों के अनुसार, मेला परिसर में हनुमान मंदिर के बिल्कुल समीप पटाखा दुकानें संचालित की जा रही हैं। जबकि प्रशासनिक दिशा-निर्देशों में संरक्षित स्थलों से कम से कम 50 मीटर की दूरी बनाए रखने का प्रावधान बताया गया है। मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में ज्वलनशील आतिशबाजी सामग्री की दुकानों का इस तरह संचालन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
50 से अधिक दुकानें, आमने-सामने व्यवस्था से बढ़ा खतरा
मेला परिसर में एक ही समूह में 50 से अधिक पटाखा दुकानें लगाए जाने की बात सामने आई है। इनमें कई दुकानें एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, जबकि निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार दुकानों के बीच न्यूनतम तीन मीटर की दूरी और आमने-सामने दुकानें नहीं लगाने का प्रावधान है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आग लगने जैसी आपात स्थिति में इस तरह की अव्यवस्थित व्यवस्था राहत एवं बचाव कार्य में भी बाधा बन सकती है।
रिहायशी मकानों तक पहुंच सकता है खतरा
पटाखा दुकानों के आसपास कई परिवारों के आवास भी स्थित हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रहते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में आतिशबाजी सामग्री का भंडारण और बिक्री होने से स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को दुकानों के लिए स्थान निर्धारित करते समय आसपास की आबादी और धार्मिक स्थल की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।
भंडारण सीमा और अग्निशमन इंतजाम पर भी सवाल
जिला प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक 6 से 8 नवंबर 2026 तक निर्धारित स्थल पर हरित आतिशबाजी के सामान का अधिकतम 20 किलोग्राम तक भंडारण एवं बिक्री की अनुमति बताई गई है। प्रत्येक दुकान पर बालू, पानी और अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता अनिवार्य है। इसके अलावा बिजली की सुरक्षित वायरिंग, प्रत्येक पंक्ति में मास्टर स्विच एवं एमसीबी और धूम्रपान पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ दुकानों पर निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखों का भंडारण और बिक्री की जा रही है। परिसर में पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा संबंधी होर्डिंग भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। इन आरोपों की प्रशासनिक जांच आवश्यक है।
जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल
इतनी बड़ी संख्या में पटाखा दुकानों के संचालन के बावजूद यदि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों ने दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता और समान मानकों का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
प्रशासन से तत्काल निरीक्षण और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन और अग्निशमन विभाग से संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दुकानों को निर्धारित L-आकार के सुरक्षित लेआउट में व्यवस्थित कराया जाए, निर्धारित भंडारण सीमा का पालन सुनिश्चित हो तथा अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता की जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लाइसेंसधारकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब पटाखा दुकानों के लिए सुरक्षा मानक और लेआउट निर्धारित हैं, तो ज्वालामुखी मेला परिसर में U-शेप में दुकानें किसके आदेश पर लगाई गईं? क्या प्रशासन किसी संभावित दुर्घटना या किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा ?




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