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आहूजा पेट्रोल पंप के नाम का डीजल रिलायंस की ओर जाने के आरोप से उठे सवाल

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20 हजार लीटर की खेप को लेकर जांच की मांग, बिल, चालान, जीपीएस और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है सच्चाई

सिंगरौली। जबलपुर से सिंगरौली के नौगढ़ स्थित आहूजा पेट्रोल पंप के लिए रवाना हुआ डीजल टैंकर पेट्रोल पंप पहुंचने के बजाय रिलायंस मुहेर की ओर जाता दिखाई देने के बाद डीजल आपूर्ति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि टैंकर को लेकर करीब दो घंटे तक बातचीत होती रही, लेकिन इसके बावजूद पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक दिन पहले ही रिलायंस की ओर जा रहे डीजल के एक टैंकर को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात सामने आई थी। इसके अगले ही दिन आहूजा पेट्रोल पंप के नाम से आने वाले डीजल टैंकर के रिलायंस मुहेर की ओर जाने की चर्चा ने डीजल आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

20 हजार लीटर डीजल की खेप पर सवाल

बताया जा रहा है कि नौगढ़ स्थित आहूजा पेट्रोल पंप के नाम पर करीब 20 हजार लीटर डीजल की खेप आने वाली थी। आरोप है कि उक्त टैंकर पेट्रोल पंप पहुंचने के बजाय रिलायंस मुहेर की ओर चला गया। यदि यह तथ्य सही है तो जांच का विषय यह है कि पेट्रोल पंप के नाम पर बुक की गई डीजल की इतनी बड़ी मात्रा को किसी अन्य स्थान पर किस आधार पर भेजा जा रहा था।

पूरे मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि टैंकर की बुकिंग किसके नाम से हुई थी, डिलीवरी चालान किसके नाम पर था और वास्तविक अंतिम उपभोक्ता कौन था।

आम उपभोक्ता या व्यावसायिक उपयोग?

मामले में सबसे अहम सवाल डीजल के उपयोग को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि पेट्रोल पंप के लिए बुक की गई डीजल की बड़ी खेप को व्यावसायिक उपयोग की ओर भेजा जा रहा था। यदि ऐसा है तो संबंधित विभाग को यह जांचना होगा कि आपूर्ति किस श्रेणी में की गई और इसके लिए निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 20 हजार लीटर डीजल की खेप को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका दूर हो सके।

कीमत के अंतर की भी हो जांच

डीजल की कीमत को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंप पर बिकने वाले डीजल और औद्योगिक अथवा व्यावसायिक उपयोग के लिए आपूर्ति किए जाने वाले डीजल की कीमत में अंतर होने की स्थिति में यह जांच जरूरी हो जाती है कि संबंधित टैंकर में भरे डीजल की बिक्री किस श्रेणी के तहत की गई थी।

जांच के दौरान बिल, भुगतान विवरण, डिलीवरी चालान, कर संबंधी दस्तावेज और वास्तविक प्राप्तकर्ता का रिकॉर्ड सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी चर्चा

एक दिन पहले रिलायंस की ओर जा रहे डीजल टैंकर पर पुलिस कार्रवाई की चर्चा के बाद अब दूसरे टैंकर के भी उसी दिशा में जाने की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। ऐसे में संबंधित पुलिस, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारियों से पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है।

जानकारों के अनुसार टैंकर की बुकिंग, ई-वे बिल, डिलीवरी चालान, जीपीएस लोकेशन, बिक्री रजिस्टर, भुगतान रिकॉर्ड और वास्तविक डिलीवरी का मिलान किया जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि डीजल किसके नाम पर बुक हुआ था और अंततः कहां पहुंचाया गया।

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