सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की मिनी रत्न कंपनी कही जाने वाली अम्लोरी परियोजना इन दिनों कोयले की कथित हेराफेरी और अधिकारियों की मनमानी को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला परियोजना के डिस्पैच अधिकारी श्री चौधरी से जुड़ा है, जिन पर अन्य ट्रांसपोर्टरों ने पक्षपात, तानाशाही और बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह पूरा मामला अब स्थानीय स्तर पर चौक-चौराहों पर चर्चा का विषय बन चुका है।
CISF की सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
अम्लोरी परियोजना की सुरक्षा और कोयले की अवैध निकासी रोकने का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सीआईएसएफ की अनुमति के बिना खदान क्षेत्र से एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इसके बावजूद, डिस्पैच अधिकारी के कथित रसूख और तानाशाही के आगे सुरक्षा बल के जवान भी मूकदर्शक बने हुए हैं। सुरक्षा तंत्र की इस अनदेखी के कारण अधिकारी की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।
‘ओम ट्रांसपोर्ट’ पर विशेष मेहरबानी के आरोप
नाम न छापने की शर्त पर कुछ ट्रांसपोर्टरों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके अनुसार:
चार साल से सक्रिय: ओम ट्रांसपोर्ट पिछले 4 वर्षों से अम्लोरी परियोजना में कार्यरत है।
कोयले का खेल: डिस्पैच अधिकारी द्वारा कथित तौर पर इस पसंदीदा ट्रांसपोर्टर को आम माल की जगह कीमती स्टीम कोयला आवंटित किया जा रहा है।
नियमों की अनदेखी: नियमों के तहत काम करने वाले अन्य ट्रांसपोर्टरों को जानबूझकर परेशान और नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
इस कथित मिलीभगत और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण एनसीएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।
अब देखना यह है कि श्रीचधरी पर इस आरोपो के बाद प्रबंधक द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है या इसी तरह चलता रहेग कोयल का काला कारोबार





