ठेकेदारी कार्य के नाम पर 1.78 करोड़ लेने के बाद चेक बाउंस, कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
सोनभद्र : जिला सहकारी बैंक मिर्ज़ापुर–सोनभद्र के निदेशक बलदेव सिंह से जुड़ा एक गंभीर आर्थिक और कानूनी मामला सामने आया है। ठेकेदारी कार्य के लिए सहयोग मांगने पर आनंद प्रताप सिंह द्वारा बलदेव सिंह को लगभग 1 करोड़ 78 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी। आनंद प्रताप सिंह के पुत्र सूर्यप्रताप सिंह, जो उनके फर्म का संचालन करते हैं, पूरे लेन-देन और कार्य की देखरेख कर रहे थे।
रकम लेने के कुछ समय बाद ही जिला सहकारी बैंक के निदेशक बलदेव सिंह द्वारा हिसाब-किताब देने में टालमटोल शुरू कर दी गई। कई बार कहने के बावजूद जब अंतिम हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो सूर्यप्रताप सिंह ने फाइनल भुगतान और सेटलमेंट के लिए लगातार दबाव बनाया।
पांच चेक दिए, सभी बाउंस
लगातार मांग के बाद बलदेव सिंह ने कुल 1 करोड़ 78 लाख रुपये के पांच चेक सूर्यप्रताप सिंह को सौंपे। जब इन चेकों को बैंक में भुगतान के लिए लगाया गया, तो सभी चेक बाउंस हो गए, जिससे मामला पूरी तरह कानूनी विवाद में बदल गया।
न्यायालय में समझौता, बाहर निकलते ही बदली बात
चेक बाउंस होने के बाद सूर्यप्रताप सिंह ने माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान जिला सहकारी बैंक के निदेशक बलदेव सिंह ने न्यायालय में समझौते की सहमति जताई, लेकिन कोर्ट से बाहर निकलते ही अपनी ही बातों से मुकर गए।
न्यायालय ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
अदालत को गुमराह करने और भुगतान न करने के आरोपों को गंभीर मानते हुए माननीय न्यायालय ने जिला सहकारी बैंक मिर्ज़ापुर–सोनभद्र के निदेशक बलदेव सिंह के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने का आदेश दिया।
प्रभावशाली पद के चलते कार्रवाई न होने के आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि NBW जारी होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई। उनका कहना है कि बलदेव सिंह एक प्रभावशाली पद पर होने के कारण स्थानीय पुलिस द्वारा न्यायालय और पुलिस अधीक्षक के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।
न्याय, वसूली और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
आनंद प्रताप सिंह और उनके पुत्र सूर्यप्रताप सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि माननीय न्यायालय द्वारा जारी NBW का तत्काल पालन कराया जाए, बकाया 1.78 करोड़ रुपये की राशि दिलाई जाए, पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और कानून से ऊपर किसी को न रखा जाए।
मामला अब केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना और जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
जिला सहकारी बैंक मिर्ज़ापुर–सोनभद्र के निदेशक बलदेव सिंह पर NBW जारी
ठेकेदारी कार्य के नाम पर 1.78 करोड़ लेने के बाद चेक बाउंस, कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
सोनभद्र।
जिला सहकारी बैंक मिर्ज़ापुर–सोनभद्र के निदेशक बलदेव सिंह से जुड़ा एक गंभीर आर्थिक और कानूनी मामला सामने आया है। ठेकेदारी कार्य के लिए सहयोग मांगने पर आनंद प्रताप सिंह द्वारा बलदेव सिंह को लगभग 1 करोड़ 78 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी। आनंद प्रताप सिंह के पुत्र सूर्यप्रताप सिंह, जो उनके फर्म का संचालन करते हैं, पूरे लेन-देन और कार्य की देखरेख कर रहे थे।
रकम लेने के कुछ समय बाद ही जिला सहकारी बैंक के निदेशक बलदेव सिंह द्वारा हिसाब-किताब देने में टालमटोल शुरू कर दी गई। कई बार कहने के बावजूद जब अंतिम हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो सूर्यप्रताप सिंह ने फाइनल भुगतान और सेटलमेंट के लिए लगातार दबाव बनाया।
पांच चेक दिए, सभी बाउंस
लगातार मांग के बाद बलदेव सिंह ने कुल 1 करोड़ 78 लाख रुपये के पांच चेक सूर्यप्रताप सिंह को सौंपे। जब इन चेकों को बैंक में भुगतान के लिए लगाया गया, तो सभी चेक बाउंस हो गए, जिससे मामला पूरी तरह कानूनी विवाद में बदल गया।
न्यायालय में समझौता, बाहर निकलते ही बदली बात
चेक बाउंस होने के बाद सूर्यप्रताप सिंह ने माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान जिला सहकारी बैंक के निदेशक बलदेव सिंह ने न्यायालय में समझौते की सहमति जताई, लेकिन कोर्ट से बाहर निकलते ही अपनी ही बातों से मुकर गए।
न्यायालय ने जारी किया गैर-जमानती वारंट
अदालत को गुमराह करने और भुगतान न करने के आरोपों को गंभीर मानते हुए माननीय न्यायालय ने जिला सहकारी बैंक मिर्ज़ापुर–सोनभद्र के निदेशक बलदेव सिंह के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने का आदेश दिया।
प्रभावशाली पद के चलते कार्रवाई न होने के आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि NBW जारी होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई। उनका कहना है कि बलदेव सिंह एक प्रभावशाली पद पर होने के कारण स्थानीय पुलिस द्वारा न्यायालय और पुलिस अधीक्षक के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।
न्याय, वसूली और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
आनंद प्रताप सिंह और उनके पुत्र सूर्यप्रताप सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि माननीय न्यायालय द्वारा जारी NBW का तत्काल पालन कराया जाए, बकाया 1.78 करोड़ रुपये की राशि दिलाई जाए, पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और कानून से ऊपर किसी को न रखा जाए।
मामला अब केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना और जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही से भी जुड़ गया है।






