औद्योगिक कंपनियों, ढाबों, होटलों, निर्माण स्थलों और ईंट-भट्टों में नियमित जांच के निर्देश
सिंगरौली। जिले में बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन एवं बंधुआ मजदूरी की प्रभावी रोकथाम को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय सतर्कता समिति एवं टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर गौरव बैनल ने की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सियाज के.एम. सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बच्चों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण, श्रम कानूनों के प्रभावी पालन और जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी जैसी सामाजिक बुराइयों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 अथवा अन्य माध्यमों से बाल श्रम से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स तत्काल कार्रवाई करे। आवश्यकता पड़ने पर रेस्क्यू अभियान चलाकर बच्चों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया जाए। राजस्व एवं पुलिस प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी की संभावनाओं पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए।
बाहर से आने वाले श्रमिकों का होगा सत्यापन
कलेक्टर ने जिले में अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों के आवश्यक सत्यापन एवं जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बाहर से आने वाले श्रमिकों से किसी भी स्थिति में बंधुआ मजदूरी न कराई जा रही हो। संबंधित विभागों को श्रमिकों की स्थिति और उनके नियोजन की जानकारी नियमित रूप से जांचने को कहा गया।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों में होगी नियमित जांच
कलेक्टर ने औद्योगिक एवं विस्फोटक कंपनियों सहित अन्य प्रतिष्ठानों, ढाबों, होटलों, निर्माण स्थलों, ईंट-भट्टों और व्यावसायिक संस्थानों में नियमित तथा औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से खतरनाक एवं रासायनिक उद्योगों तथा खनिज प्रसंस्करण से जुड़ी संस्थाओं में बाल श्रमिकों के नियोजन की जांच करने पर जोर दिया गया।
श्रम विभाग, पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि कहीं भी बाल श्रम या अन्य अनियमितता पाए जाने पर संबंधित नियोक्ता एवं संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास पर जोर
बैठक में रेस्क्यू किए गए बच्चों एवं श्रमिकों के पुनर्वास को लेकर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से तत्काल जोड़ा जाए। बच्चों के लिए सुरक्षित ठहराव, पुनर्वास और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे दोबारा बाल श्रम अथवा बंधुआ मजदूरी के दुष्चक्र में न फंसें।
बैठक में अपर कलेक्टर पीएस त्रिपाठी, श्रम पदाधिकारी डीपी वाजपेयी, बाल संरक्षण अधिकारी नीरज शर्मा, सीडब्ल्यूसी चेयरमैन आरडी पाण्डेय, शिक्षा विभाग से सर्वेश कुमार द्विवेदी, विशेष किशोर पुलिस इकाई से अशोक सिंह तोमर, श्रम निरीक्षक राहुल चैकसे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।




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