500 से अधिक विस्थापित परिवारों के शामिल होने का दावा, 45 सूत्रीय मांगों को लेकर एनसीएल मुख्यालय का घेराव
सिंगरौली। जयंत कोयला खदान के विस्तार से प्रभावित विस्थापित परिवारों ने मुआवजा, पुनर्वास, पुनर्स्थापन और रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार से नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के मोरवा स्थित मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। सिंगरौली संयुक्त पुनर्स्थापन संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में 500 से अधिक प्रभावित परिवारों के शामिल होने का दावा किया गया। आंदोलन के समर्थन में मोरवा शहर भी बंद रहा और बाजार की अधिकांश दुकानें बंद रहीं।प्रदर्शनकारियों ने एनसीएल NCL के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर विरोध जताया। इसी दौरान एनसीएल कर्मचारियों के कार्यालय में प्रवेश को लेकर प्रदर्शनकारियों और कर्मचारियों के बीच कहासुनी तथा धक्का-मुक्की की स्थिति बनने की भी जानकारी सामने आई। मौके पर पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहे।

45 सूत्रीय मांग-पत्र में पुनर्वास से लेकर रोजगार तक के मुद्दे
संघर्ष मोर्चे की ओर से एनसीएल NCL प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष 45 सूत्रीय मांग-पत्र रखा गया है। इसमें प्रभावित परिवारों को नगर निगम क्षेत्र अथवा प्रभावित इलाके में पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुनर्वास ऐसी जगह होना चाहिए, जहां परिवारों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
विस्थापितों ने स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल, सामुदायिक भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पुनर्स्थापन की मांग भी की है। उनका कहना है कि विस्थापन का असर केवल मकान और जमीन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे पर पड़ता है।
न्यू मार्केट की 44 दुकानों के मुआवजे की मांग
मांग-पत्र में न्यू मार्केट की 44 दुकानों के दुकानदारों को मुआवजा देने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा आवासीय भूमि के लिए 16 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तथा व्यावसायिक और डायवर्टेड भूमि के लिए 19,800 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर निर्धारित करने की मांग की गई है।
विस्थापितों ने भवनों और अन्य परिसंपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन कराने, बाजार मूल्य में वृद्धि का लाभ देने तथा एन्युटी राशि का उचित निर्धारण करने की मांग रखी है।
निविदाओं और रोजगार में आरक्षण की मांग
मोर्चे ने एनसीएल की दो करोड़ रुपये तक की निविदाओं में विस्थापितों को तथा 50 करोड़ रुपये तक की निविदाओं में विस्थापित समूहों को आरक्षण देने की मांग की है। इसके साथ ही एनसीएल से जुड़ी परियोजनाओं में रोजगार आरक्षण, विस्थापित परिवारों के बच्चों के लिए स्कूलों में सीट आरक्षित करने और परिवारों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।

पूर्व विधायक ने मुआवजा प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पूर्व विधायक एवं विस्थापन मंच के संरक्षक राम लल्लू वैश्य ने आंदोलन को समर्थन देते हुए मुआवजा प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों की जमीन, मकान, व्यवसाय और अन्य परिसंपत्तियों का उनकी वास्तविक स्थिति के अनुसार अलग-अलग मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जयंत क्षेत्र का विस्थापन शहरी स्वरूप का है, इसलिए सभी परिवारों को एक समान आधार पर मुआवजा देने के बजाय उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात
संघर्ष मोर्चे ने कहा है कि मांगों पर ठोस समाधान होने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने एनसीएल प्रबंधन और प्रशासन से प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर मांगों का समयबद्ध समाधान निकालने की मांग की है। वहीं प्रदर्शन के चलते मोरवा में बाजार बंद रहने से जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित रहीं।




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