सिंगरौली जिले के मोरवा थाने की कुर्सी इन दिनों किसी सिंहासन से कम नहीं लग रही। चर्चा ऐसी कि गली-मोहल्ले से लेकर चाय और पान की दुकानों तक, हर कोई जानना चाहता है —आख़िर मोरवा थाने की कमान किस “साहब” के हाथ जाएगी? रेस में कई नाम उछाले जा रहे हैं,लेकिन इन्हीं चर्चाओं के बीच एक नाम ऐसा भी उभर रहा है जो नया नहीं, बल्कि पुराना और बेहद चर्चित है। बताया जाता है कि यह वही साहब हैं.
जो साल 2018 लंघाडोल में एक महिला से जुड़े प्रेम-प्रसंग के मामले को लेकर खूब सुर्खियों में रहे थे।कहते हैं कि उस वक्त मामला इतना “संवेदनशील” था कि 5 से 7 लाख रुपये में ही न्याय का तराजू संतुलित कर दिया गया।
तब साहब थाने के आसपास ही ढोल बजाते, कभी इधर-उधर चक्कर काटते नज़र आते थे,लेकिन अब लगता है कि मनसा बदल चुकी है। अब बात सिर्फ थाने के आंगन तक सीमित नहीं,साहब तो पहाड़ चढ़ने का मूड बना चुके हैं। इलाके में चर्चा गर्म है कि जिस 2018 का मामला कभी गले की फांस बना था, आज वही फांस सीढ़ी में बदल दी गई है। और चर्चाओं की मानें तो मोरवा थाने की कुर्सी की दौड़ में साहब सबसे आगे बताए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि कुर्सी साहब को मिलती है
या फिर 2018 की फाइल किसी अलमारी से अचानक बाहर निकल आती है।क्योंकि यहाँ…याददाश्त अक्सर कुर्सी के हिसाब से बदल जाती है।
भाग : 2 चर्चित थानेदार के सहयोगी पुलिस विभाग से हुए निलंबित साहब बन बैठे ईमानदार।






